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जानिये शेयर मार्केट में क्या होती है शॉर्ट सेलिंग !!

सेल शॉर्ट यानी तेजी से बिक्री का मतलब स्टॉक को तेजी से कम करना है। यह लंबी अवधि तक बिक्री का उलटा है। निवेश के क्षेत्र में शॉर्ट सेलिंग खरीद-फरोख्त की एक अग्रिम रणनीति होती है। इसमें कोई पेशेवर निवेशक ब्रोकर से कोई सिक्योरिटी मसलन शेयर उधार लेकर उसे बेच देता है। लेकिन इसमें एक तय अवधि में शेयर को खरीदने और उसे बेचने की बाध्यता होती है। शॉर्ट सेलिंग का मकसद शेयर या अन्य प्रतिभूति को कम कीमत पर वापस खरीदकर उससे लाभ कमाना है।

एक निवेशक को जब कीमत कम होने की संभावना होती है, तो वह तेजी से बिक्री करेगा। इसके बाद अगली तारीख में कम कीमतों पर प्रतिभूति मसलन शेयर को खरीद लेगा। इस तरह वह मुनाफा कमाएगा। इस मामले में अगर उस शेयर की कीमत बढ़ जाती है तो निवेशक को नुकसान होगा। शॉर्ट सेलिंग की रणनीति की कामयाबी बहुत कुछ बाजार की सटीक समझ और नवीनतम जानकारियों तक पहुंच पर निर्भर करती है। इसके बगैर अगर आपने यह रणनीति अपनाई तो पैसा गंवाने का खतरा काफी अधिक होता है। शॉर्ट सेलिंग को हेज रणनीति के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

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क्या स्टॉक के भाव कम होने पर भी लाभ कमाया जा सकता है ?

दोस्तों, short selling के प्रोसेस को समझना बहुत मजेदार है, क्योकि इस concept में पहले बेचा जाता है और बाद में ख़रीदा जाता है, और स्टॉक के भाव में कमी आने से भी लाभ कमाया जा सकता है,

सामान्यतया हम सभी यही जानते है कि स्टॉक मार्केट में स्टॉक खरीद (Buy) और बेचकर (Sell) लाभ कमाया जाता है,

यानी स्टॉक मार्केट में लाभ कमाने के लिए स्टॉक को कम भाव में खरीदो और ज्यादा भाव में बेचो,

(Buy Low – Sell High)

और इस तरह हमें पहले स्टॉक कम भाव में खरीदना होता है, और बाद में स्टॉक का भाव बढ़ जाने पर उसे ज्यादा भाव में बेच कर लाभ कमाया जाता है,’लेकिन स्टॉक मार्केट में इसके ठीक उल्टा एक concept है, जिसे कहते है – “Short selling”

short selling के इस concept में अगर कोई स्टॉक मेरे पास नहीं भी है, तो भी अगर मै चाहू तो उस स्टॉक पहले बेचने का आर्डर दे सकता हु, और लाभ कमा सकता हु,

आइए जानते है कैसे –

स्टॉक मार्केट में लाभ कमाने के लिए जरुरी नहीं कि स्टॉक का भाव बढेगा तभी लाभ आप लाभ कमाएंगे, बल्कि किसी स्टॉक के भाव गिरने पर बहुत अच्छा लाभ कमाया जा सकता है,

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जी हा – अगर किसी स्टॉक का भाव गिर रहा है, तो भी आप उसमे लाभ कमा सकते है,

स्टॉक का भाव गिरने पर लाभ कमाने के लिए,

आपको स्टॉक को पहले ज्यादा कीमत पर बेचना होता है, भले ही आपके पास वो स्टॉक हो या नहीं, और बाद में जब स्टॉक का भाव गिर जाता है, तो उसे कम भाव में वापस खरीदना होता है,

इस तरह जब आप कोई स्टॉक पहले बेचते है, और बाद में ख़रीदते है, तो इसे Short Selling कहा जाता है,

SHORT SELLING में PROFIT और LOSS कब होता है?

PROFIT ON SHORT SELLING

Short Sell के केस में लाभ तब होता है, जब हम स्टॉक को high price पर sell करके, बाद में जैसे ही स्टॉक का भाव गिरे उसे Low price में खरीद ले,

Profit (Short Selling) = Sell High – Buy Low

जैसे – मान लीजिए आपको पता है कि रिलायंस के शेयर का भाव गिरने वाला है, तो ऐसे केस  में जब भाव गिरने वाला है तो भी आप रिलायंस के शेयर में लाभ कमा सकते है,

इसके लिए आपको पहले रिलायंस के शेयर को high price पर बेचना होगा, और जैसे ही रिलायंस के शेयर का भाव गिरे तो आपको उसे low price पर खरीदना होगा,

मान लीजिए, आपने रिलायंस के 10 शेयर को आपने पहले 100 रूपये के भाव से पहले बेच दिया,

और आपके बेचने के बाद जैसा आपने सोचा था, रिलायंस का भाव गिर जाता है, और ये 95 रूपये हो जाता है,

तो जैसे ही 95 हुआ आपने रिलायंस के  10  शेयरशेयर 95 के भाव से खरीद लिया ,

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इस तरह आपने कुल कितने मूल्य का बेचा = 100 x 10 = 1000

और कुल कितने का ख़रीदा = 95 x 10 = 950

तो इस तरह short selling में होने वाला लाभ होगा :  1000 (sell) – 950 (purchase) = 50 (profit)

LOSS ON SHORT SELLING

आइये अब बात करे है Short Sell के केस में आपको नुकसान यानि loss कब होता है,

याद रखिए –

short selling में आपक loss तब होता है, जब आप स्टॉक को high price पर sell करके, आपके सोच कि अनुसार स्टॉक का भाव गिरता नहीं है, और आपने जितने में उसे बेचा उस से ऊपर चला जाता है, तो ऐसे केस में आपको अपनी short selling के सौदे को कम्पलीट करने के लिए आपको high price पर भी स्टॉक खरीदना ही पड़ता है,

क्योकि आपने जिसको स्टॉक पहले बेचा है, उसे तो स्टॉक आपको तय समय में देने ही पड़ेंगे, नहीं तो आपका सौदा पूरा नहीं होगा,

तो इस तरह जब आप high price पर स्टॉक को sell कर देते है, और उसे sell price से भी ऊपर के high price पर आपको वापस स्टॉक खरीदना पड़ता है, तो ऐसे केस में आपको loss होता है,

Loss (Short Selling) = Sell price (Lower than Buy) – Buy price (High than sell)

जैसे – मान लीजिए आपको पता चला  कि रिलायंस के शेयर का भाव गिरने वाला है , और आपने सोचा कि short selling करके लाभ कमाते है ,

और इसके लिए आपने रिलायंस 10 शेयर को आपने पहले 100 रूपये के भाव से पहले बेच दिया (short sell),

और आपके बेचने के बाद जैसा आपने सोचा था, वैसा नहीं हुआ और रिलायंस का भाव गिरने के बजाये,  रिलायंस के शेयर का भाव ऊपर चला 105 रूपये हो जाता है,

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और आपको अपने सौदे को दिन के अंत में पूरा भी करना है, तो आपको अपने सौदे को पूरा करने के लिए मजबूरन रिलायंस के शेयर को 105 रूपये पर खरीदना होगा,

और इस तरह आपने पहले बेचा 100 रूपये पर,

और बाद में ख़रीदा 105 रूपये से, तो आपको प्रति शेयर 5 रूपये का loss हुआ,

यानी

तो इस तरह short selling में होने वाला loss  :  1000 (toal sell ) – 1050 (total purchase) = 50 (profit)

ध्यान दीजिए कि ये एक short selling एक incomplete Transaction होता है, और वो तभी पूरा होता है, जब आप बेचे गए स्टॉक खरीद लेते है,

और इस तरह आपको तय समय के अन्दर अपने सौदे को अनिवार्य रूप से कम्पलीट करना होता है, और इसी अनिवार्यता के कारण आपको मज़बूरी में शेयर का भाव ज्यादा होने पर भी खरीदना होता है, ताकि आपका सौदा पूरा हो जाये, लेकिन जब आप ऐसा करते है, तो आपको loss भी हो जाता है,

SHORT SELLING कब और कैसे किया जाता है –

short selling दो तरह से किया जा सकता है

  • Intra day short selling – Equity
  • Positional Short selling – Future and Option

INTRA DAY में SHORT SELLING

Short selling आम तौर पर किसी particualr स्टॉक के सम्बन्ध में intra day trading में किया जाता है, यानी आपने आज ही स्टॉक को बेचा और आज ही स्टॉक को मार्केट बंद होने से पहले ख़रीदा और अपने सौदे को कम्पलीट कर लिया,

Important point in Short selling:

अगर आप किसी वजह से स्टॉक को पहले short sell करने के बाद उस सौदे को पूरा नहीं करते है, यानी मान लीजिए आपने स्टॉक को बेच दिया short sell कर दिया, लेकिन उसे खरीदना भूल जाते है,

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तो ऐसे केस में आपने जिसको स्टॉक बेचा है , उसको स्टॉक कि डिलीवरी नहीं मिल पायेगी, और स्टॉक एक्सचेंज इस सौदे में आपको short selling का डिफाल्टर मानते हुए, आपके ऊपर बहुत बड़ी रकम कि वसूली fine और penalty के रूप में कर सकता है,

इसलिए जब short selling करे तो ध्यान रखे, कि आप सौदे को समय के अन्दर कम्पलीट कर ले,

FUTURE AND OPTION (DERRIVATE) में SHORT SELLING

Future और option (derrivate) की trading में Short selling बहुत ही पोपुलर है, क्योकि इसमें आप intra day के साथ साथ अपनी short selling पोजीशन को expiry date जो की महीने का आखिरी गुरुवार होता है,

तब तक अपनी short पोजीशन को carry कर सकते है,

SHORT SELLING का PURPOSE

short selling का purpose होता है, हेजिंग, जिसे हम अपनी निवेश कि सुरक्षा भी कह सकते है,

स्टॉक मार्केट में short टर्म में मार्केट बहुत सारे उतार चढ़ाव देखने को मिलते है, इन उतार चदाव से बचने के लिए हमें अपनी पोर्टफोलियो कि सुरक्षा करने होती है, जिसे हेजिंग कहते है,

और पोर्टफोलियो कि short टर्म में उतार चढाव से सुरक्षा के लिए हेजिंग का इस्तेमाल किया जाता है, और हेजिंग के लिए short selling बहुत अच्छा काम करता है,

जैसे – मान लीजिए मेरे पास रिलायंस के १ लाख रूपये के शेयर है, और किसी दिन पता चलता है कि स्टॉक मार्केट में रिलायंस के भाव गिरने वाले है, लेकिन ऐसा सिर्फ अनुमान है, जरुरी नहीं कि स्टॉक का भाव गिरे ही,

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लेकिन अगर रिलायंस के भाव जितने रूपये से गिरेंगे, तो उसमे उतना हमारा loss होगा,

तो इस loss से बचने के लिए, मै रिलायंस के फ्यूचर का  short selling का सहारा ले सकता हु,

और short selling में जो भी लाभ होगा, वो मेरे स्टॉक निवेश पर होने वाले नुकसान कि भरपाई कर डेता है,

तो इस तरह short selling का मकसद है, अपने लम्बे समय के निवेश पर loss कि भरपाई, यानि पोर्टफोलियो हेजिंग

लेकिन आजकल लोग इसका ज्यादा इस्तेमाल सट्टा लगाने (speculation) में ही कर रहे है,

SHORT SELLING कब करने चाहिए

  • जब बजट जैसी की बड़ा इवेंट होने वाला है, और बजट अच्छा नहीं होने की उम्मीद ऐसा लगता है, कि शेयर के भाव गिरेंगे
  • जब कभी इंटरनेशनल मार्केट में गिरावट हो और जिसका असर इंडियन मार्केट में पड़ने वाला है,
  • जब किसी कम्पनी का फाइनेंसियल रिपोर्ट ख़राब होने कि उम्मीद हो
  • जब कोई राजीनीतिक बदलाव की उम्मीद में लोग स्टॉक मार्केट को लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं है, और मार्केट गिरने कि उम्मीद हो
  • जब रिज़र्व बैंक किसी तरह कि नयी पालिसी लाता है, या किसी पालिसी में बदलाव करता है,
  • जब किसी कम्पनी के मैनेजमेंट में बदलाव होने से कंपनी के स्टॉक के भाव गिरने कि उम्मीद हो
  • ऐसी कोई भी घटना जिस से स्टॉक मार्केट बहुत ज्यादा प्रभावित होने वाला हो, और ऐसा लगे कि स्टॉक के भाव गिरेंगे.

आशा है आपको short selling का ये पोस्ट जरुर पसंद आया होगा, और शोर्ट selling से सम्बंधित आपके सवालों के जवाब मिल गए होंगे,

अगर पोस्ट अच्छा लगा तो नीचे अपना सवाल और कमेंट जरुर लिखे.

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