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शेयर बाजार अमीरों के लिए? दूर कीजिए ऐसे मिथक !!

स्टॉक मार्केट में निवेश के गुर सीखने का मतलब है, निवेश करने से जुड़े मिथकों से छुटकारा पाना। शेयर बाजार से जुड़े मिथक में न सिर्फ आधी-अधूरी जानकारी होती है, बल्कि शेयर बाजार की बारीकी की गलत व्याख्या भी होती है। शेयर ब्रोकिंग कंपनी एंजेल ब्रोकिंग ने एक ब्लॉग में निवेश के कुछ मिथकों का जिक्र किया है। शेयर बाजार में निवेश से पहले आपका इन मिथकों से छुटकारा पाना जरूरी है। हम बता रहे हैं, निवेश से जुड़े वे छह मिथक और उससे कैसे पाएं छुटकारा।

1. सिर्फ अमीरों के लिए है शेयर बाजार 
शेयर बाजार में शेयर खरीदने के लिए आपका करोड़पति होना जरूरी नहीं है। शेयर बाजार से संपत्ति बनाने के लिए आपको बहुत बड़ा निवेश नहीं करना होता है। आपको बस जल्द शुरुआत करना और निर्धारित अवधि में निरंतर निवेश को बरकरार रखना होता है। 

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2. 40 की उम्र में शेयर बाजार में निवेश सही नहीं 
अगर आप 40 साल के हैं, तो भी आपके पास कमाने के लिए अभी 20 साल बचे हैं। हां, यह दूसरी बात है कि जैसे-जैसे आपकी आयु बढ़ती है, आपका इक्विटी में निवेश कम होता जाता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि आप इक्विटी में निवेश बिल्कुल ही बंद कर दें। दूसरी तरफ, अगर आप जोखिम सहन करने की क्षमता में इजाफा करते हैं, तो आप इक्विटी में ज्यादा निवेश करने के योग्य हो जाते हैं। 

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3. ओल्ड इज गोल्ड 
अगर आप 25 साल पहले के सेंसेक्स कंपोजिशन को देखें और इसकी तुलना आज के सेंसेक्स से करें, तो आपको भारी अंतर नजर आएगा। किसी कंपनी में निवेश केवल इस कारण से नहीं करें, क्योंकि उस कंपनी में निवेश आपके पिताजी भी करते थे। इन 25 सालों में आईबीएम आज कहां है, जबकि आप देख सकते हैं कि इन्हीं 25 सालों में एप्पल और ऐमजॉन के स्टॉक कहां पहुंच गए हैं। 

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4. ज्यादा रिस्क मतलब ज्यादा रिटर्न
ज्यादा रिस्क ज्यादा रिटर्न देता है, लेकिन यह हमेशा लागू नहीं होता। शेयर बाजार में निवेश आपकी जोखिम सहन करने की क्षमता का आकलन और रिस्क रिटर्न ट्रेड ऑफ को तय करता है। इसलिए, यह मत समझिए कि अगर आप ज्यादा रिस्क ले रहे हैं, तो आप ज्यादा रिटर्न के हकदार है। आप जैसा सोचते हैं, यह उस तरह से काम नहीं करता। 

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5. एफआईआई के पसंदीदा शेयरों पर दांव 
विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) कभी अपने पोर्टफोलियो को व्यापक करने के लिए शेयर खरीदते हैं, तो कभी एक कंपनी के शेयर बेचकर दूसरी कंपनी के शेयर खरीद रहे होते हैं। इसलिए ट्रांजैक्शन की प्रकृति पर गौर किए बिना इस तरह के शेयर खरीदकर आप मुश्किल में फंस सकते हैं। 

6. गिरावट पर खरीदारी करना
बाजार में गिरावट पर बिना सोचे-समझे किसी भी कंपनी के शेयरों पर टूट पड़ना समझदारी नहीं होती। यह कंपनी और उसके हाल-फिलहाल के प्रदर्शन पर निर्भर करता है कि उसके शेयरों से आगे आपको फायदा मिलेगा या नहीं। 

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