BAKS CLOTHING CO. (11)

यह थे एक रिटेल कंपनी के मालिक लेकिन शेयर मार्केट ने इन्हे रातो रात बना दिया 60 हजार करोड़ का मालिक !! जानिये कैसे

एक रात में आपकी संपत्ति डबल हो जाए…यह सुनकर आपको एक लॉटरी के टिकट पर बड़ा इनाम जीतने जैसा लग रहा होगा। ऐसा ही कुछ राधाकिशन दमानी के साथ हुआ। महज 24 घंटे में उनकी संपत्ति 100 फीसदी बढ़ गई। इन बातों को सुनकर आपके मन में यह सवाल उठा होगा कि आखिर यह शख्स कौन है और कैसे इसकी संपत्ति डबल हो गई? आइए जानते हैं कैसे एक निवेशक रातों-रात करोड़पति बन गया और देश के टॉप अमीरों की लिस्ट में शामिल हो गया।

एक रात में डबल हुई संपत्ति: 20 मार्च 2017 तक राधाकिशन दमानी सिर्फ एक रिटेल कंपनी के मालिक थे, लेकिन 21 मार्च की सुबह जैसे उन्होंने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) की घंटी बजाई, वैसे ही उनकी संपत्ति 100 फीसदी तक बढ़ गई। 21 मार्च की सुबह जब राधाकिशन दमानी की कंपनी का आईपीओ शेयर बाजार में लिस्ट हुआ तो उनकी संपत्ति, गोदरेज परिवार और राहुल बजाज से भी ज्यादा हो गई. डीमार्ट का शेयर 604.40 रुपए पर लिस्ट हुआ, जबकि इश्यू प्राइस 299 रुपये रखा गया था। यह 102 फीसदी का रिटर्न है।पिछले 13 साल में लिस्टिंग के दिन किसी शेयर की कीमत में इतनी बढ़ोतरी नहीं हुई थी।

डाउनलोड करे शेयर मार्केट फ्री इ बुक और सीखे कैसे शेयर मार्केट में किया जाता है काम

सुपरमार्केट रिटेल चेन D-Mart के मालिक राधाकृष्‍णन दमानी ने हुरुन इंडिया के अमीरों की सूची में जगह बनाई है।दमानी का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि 62 साल के रिटेल किंग की संपत्ति में सबसे ज्यादा 321 फीसदी की तेजी आई है।

ऐसे शुरू किया कारोबार: दमानी ने शुरुआती दिनों में बॉल-बियरिंग का कारोबार शुरू किया, लेकिन नुकसान होने के चलते बंद कर दिया। पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने भाई के साथ स्टॉक मार्केट ट्रेडिंग शुरू की।उन्होंने बेहतर मौके तलाश कर छोटी कंपनियों में निवेश शुरू किया। सन 1990 तक उन्होंने निवेश कर करोड़ों कमा लिए थे।फिर उन्होने रीटेल कारोबार में उतरने की सोची और धीरे-धीरे उनका कारोबार चल निकला।

सुर्खियों से दूर रहना:
राधाकिशन दमानी हमेशा सुर्खियों से दूर रहते हैं। वह हमेशा सफेद कपड़े पहनते हैं और शेयर बाजार के दिग्गज निवेशकों के बीच ‘मिस्टर वाइट एंड वाइट’ के नाम से मशहूर हैं। उन्होंने 1999 में रिटेल बिजनस शुरू किया था, ये वो वक्त था जब अंबानी, कुमार मंगलम बिड़ला और फ्यूचर ग्रुप के किशोर बियानी के कदम इस सेक्टर में आए भी नहीं थे।

लंबी अवधि के निवेश पर नजर रखना
वारेन बफेट की ही तरह दमानी भी एक वैल्यू इन्वेस्टर हैं जो लंबी अवधि के निवेश पर दूरदृष्टि रखते हैं। वो जब उद्यमी बने थे, तब भी उन्होंने अपना यह नजरिया बरकरार रखा और उन्होंने बिना किसी शार्टकट का इस्तेमाल किए डी-मार्ट का निर्माण किया।

डाउनलोड करे शेयर मार्केट फ्री इ बुक और सीखे कैसे शेयर मार्केट में किया जाता है काम

छोटे से शुरुआत:
दमानी ने छोटे से शुरुआत की और विस्तार के लिए कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई। छोटे स्तर के कारण ही उन्हें सप्लाई चेन पर नियंत्रण करने में आसानी रही और वो शुरुआत से ही मुनाफे में ध्यान केंद्रित कर पाए। अपने अस्तित्व के 15 वर्षों में डी-मार्ट ने प्रत्येक वर्ष लाभ कमाया है।

अपने लोगों को अहमियत देने की खूबी:
दमानी ने अपना बिजनेस अपना बाजार की फ्रेंचाइजी लेकर शुरु किया। उस वक्त से ही उन्होंने विक्रेताओं और आपूर्तिकर्ताओं के साथ निजी संबंधों का निर्माण करना शुरू कर दिया था। उन्होंने दोनों को तवज्जो दी और उन्होंने इन दोनों को कभी भी हतोत्साहित नहीं होने दिया और उनके स्टोर्स में आउट ऑफ स्टॉक वाली स्थिति कभी नहीं आई।

सस्ता खरीदो, कम कीमत पर बेचो:
दमानी यह बात अच्छे से जानते हैं कि वो क्या कर रहे हैं। वो भारी छूट पर दैनिक उपयोग के उत्पाद उपभोक्ता को पेश करते हैं। उनके काम करने के तरीकों में से एक यह है कि वो आपूर्तिकर्ताओं और विक्रेताओं को भुगतान एक दिन के भीतर करने की कोशिश करते हैं, जबकि इंडस्ट्री के नॉर्म्स के मुताबिक यह अवधि करीब एक हफ्ते की है। शुरुआती भुगतान के कारण ये लोग इन्हें माल सस्ती दर पर उपलब्ध करवाते हैं।

स्थानीय होना:
हालांकि डी-मार्ट देश की सबसे सफल किराने की रिटेल श्रृंखला है, दमानी ने इसे पश्चिमी राज्यों तक ही सीमित रखा है। इसका एक कारण व्यापक आपूर्ति श्रृंखलाओं के बजाए स्थानीय आपूर्ति पर निर्भरता है।

धीमे चलो:

हालांकि डी-मार्ट ने अपना बिजनेस 16 साल पहले शुरू किया था फिर भी इसके कुछ राज्यों में सिर्फ 119 स्टोर ही हैं। यह अंबानी और बियानी के स्वामित्व वाली कंपनियों की तुलना में एक छोटी संख्या है। तेजी से विस्तार के बजाय, दमानी ने धीमी गति से चलने का रास्ता अपनाया, जिससे उन्हें लाभप्रदता के रास्ते पर अग्रसर होने दिया।

डाउनलोड करे शेयर मार्केट फ्री इ बुक और सीखे कैसे शेयर मार्केट में किया जाता है काम

कोई तामझाम नहीं:
दमानी को अच्छे से पता है कि उनके उद्यम के पीछे का उद्देश्य कम कीमतों पर उपभोक्ता वस्तुओं की आपूर्ति करना है और वो तामाझाम में अपना समय बरबाद किए बगैर ऐसा ही करते हैं। उनके स्टोर्स में सीमित श्रेणी के उत्पाद बस करीने से सजे होते हैं।

भीड़ का पीछा नहीं करना:
दमानी ने यह बात अच्छे से सीखी और परखी है कि एक निवेशक के तौर पर कभी भी झुंड का पीछा नहीं करना चाहिए। एक उद्यमी के तौर पर भी उनका यही नजरिया है।

क्रेडिट से बचें:

खुदरा व्यापार में क्रेडिट और देरी से भुगतान जोखिम भरा है, क्योंकि वो बुरी तरह से आपकी आपूर्ति और लागत को प्रभावित कर सकते हैं। दमानी क्रेडिट से दूरी रखते हैं और कोशिश करते हैं कि वो अपने आपूर्तिकर्ताओं की अपेक्षा मुताबिक जल्द से जल्द भुगतान कर दें।

 

Connect With Us
Facebook
Facebook
Instagram
LinkedIn
Tags: No tags

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *