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ये हैं शेयर बाजार के सिकंदर, 10 साल में नहीं दिए निगेटिव रिटर्न !!

रिटर्न देने की शेयरों की क्षमता साबित हो चुकी है. लंबी अवधि में इक्विटी को कोई अन्य एसेट क्लास मात नहीं दे सकता है. हालांकि, शेयरों का प्रदर्शन कई बातों पर निर्भर करता है. इनमें कंपनी की आंतरिक नीतियां, सरकारी नीतियों में बदलाव, बाजार की कारोबारी धारणा, प्रतिस्पर्धा और आर्थिक विकास इत्यादि शामिल हैं. 

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उदाहरण के लिए एमटीएनएल को लेते हैं. इस टेलीकॉम कंपनी का दिल्ली और मुंबई में कभी एकक्षत्र राज हुआ करता था. बीते 19 साल में इसने अपनी जमीन खो दी है. बढ़ती प्रतिस्पर्धा में इसने घुटने टेक दिए. यह अपने काम करने के तरीकों में बदलाव नहीं कर सकी. इस अवधि में कंपनी का शेयर 92 फीसदी से ज्यादा लुढ़क चुका है.

अपने नुकसान को घटाने के लिए लंबी अवधि के लिए निवेश करें पांच साल या इससे अधिक की अवधि के निवेश के लिए बीएसई500 के नुकसान की दर शून्य है.

अंदर और बाहर के जोखिमों को देखते हुए यह अहम हो जाता है कि निवेश से पहले कंपनी की रिस्क-रिटर्न प्रोफाइल का मूल्यांकन कर लिया जाए. निवेश की अवधि बढ़ने के साथ इक्विटी निवेश से नुकसान के आसार कम हो जाते हैं.

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बीते 19 साल (2000 से 2018) के आंकड़ों का विश्लेषण करने से पता चलता है कि निवेश की अवधि पांच साल या इससे अधिक जाने पर बीएसई500 इंडेक्स के नुकसान की दर घटकर शून्य हो जाती है.

हमने कुछ कंपनियों का पता लगाया है. इन्होंने 2000 से कभी भी 3, 5 और 10 साल की अवधि में निगेटिव रिटर्न का मुंह नहीं देखा है. यहां इन कंपनियों की लिस्ट दी गई है.

ये हैं कुछ चुनिंदा भरोसेमंद शेयर टेबल में इन शेयरों के लिए 2018-19 के अनुमानों और विश्लेषकों की राय बताई गई है.

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