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अगर आपको भी शेयर मार्किट में नुकसान हुआ है तो भरपाई के लिए करे यह काम !!

जब अचानक शेयर बाजार में गिरावट आती है, तो शेयरधारकों का दिल बैठ जाता है। लेकिन शेयर बाजार में हर बार गिरावट का मतलब यह नहीं है कि निवेशक का दिवाला ही निकले। जब मार्केट में करेक्शन होता है, तब बाजार में गिरावट आना स्वभाविक है। ऐसे में निवेशकों को घबराने की बजाए संयम रखकर आगे की रणनीति तय करनी चाहिए। अक्सर करेक्शन के दौरान मार्केट में जब हलचल मचती है, तो निवेशक कुछ बड़ी गलतियां कर जाते हैं, जिसके चलते उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ती है। हम कुछ ऐसी आम गलतियों के बारे में बता रहे हैं, जिनसे निवेशकों को अभी बचना चाहिए।

1.मत करिए किसी खास प्राइस का मोह 
निवेशक एक कीमत तय करते हैं और उस लेवल तक वे शेयर को होल्ड किए रहते हैं। आमतौर पर यह प्राइस शेयर की खरीद कीमत होती है। कुछ मामलों में यह स्टॉक का ऑल टाइम हाई प्राइस भी हो सकता है। निवेशक इस लेवल को ध्यान में रखकर किसी शेयर में बने रहने या निकलने का फैसला करते हैं। हालांकि, गिरते हुए बाजार में खास प्राइस का मोह भारी पड़ सकता है। इस वजह से निवेशक उससे अधिक समय तक शेयर को होल्ड करते हैं, जितने समय तक उन्हें करना चाहिए था। शेयर प्राइस में कई वजहों से गिरावट आ सकती है, लेकिन निवेशक खास प्राइस के मोह में शेयर को होल्ड किए रहते हैं। उन्हें उम्मीद होती है कि शेयर की कीमत फिर उस लेवल तक पहुंचेगी। वे ऐसा करते वक्त स्टॉक के फंडामेंटल्स की पड़ताल नहीं करते।

2.नुकसान के बाद एवरेज प्राइस कम करने के लिए शेयर न खरीदें
बाजार में हर कोई गलती करता है। लेकिन कुछ निवेशक गलतियों को बढ़ाते जाते हैं। अगर आपने कोई शेयर खरीदा है और उसकी कीमत लगातार कम हो रही है तो एवरेज बाइंग प्राइस कम करने के लिए और शेयर मत खरीदिए। निवेशक कम कीमत पर शेयर खरीदकर अपना लॉस घटाने की कोशिश करते हैं। हालांकि, गिरते हुए बाजार में यह रणनीति अच्छी नहीं है।

3.गिरावट वाले शेयर में निवेश नहीं

अगर आपने कोई गलत शेयर खरीद रखा है और उसमें काफी गिरावट आ जाती है, तो बाद आप बीच में वही शेयर और मात्रा में न खरीदें इससे नुकसान बढ़ेगा। एक खराब स्टॉक में और पैसा लगाने में कोई समझदारी नहीं है। हां, अगर आपका स्टॉक अच्छी क्वॉलिटी का है, तो दाम कम होने पर उसमें निवेश बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा, किसी भी सूरत में गिरावट आने पर शेयर में निवेश नहीं बढ़ाना चाहिए।

4.गलती को ‘तुक्के से प्रॉफिट’ में बदलने का मौका न समझें
जब शेयर प्राइस में गिरावट आती है तो लोग इन्वेस्टमेंट न्यूज और रिसर्च रिपोर्ट्स खंगालने लगते हैं। वे इनमें ऐसे संकेत ढूंढते हैं, जिनसे उनकी सोच सही साबित हो। वे उन तथ्यों की अनदेखी करते हैं, जिनसे उनकी सोच गलत साबित हो सकती है। बाजार में करेक्शन वाले दौर में यह ट्रेंड कुछ ज्यादा ही देखा जाता है। इसके चलते निवेशक गलत फैसले करते हैं। जो स्टॉक्स आपके पोर्टफोलियो में हैं और इस समय वे नेगेटिव में चल रहे हैं। उन्हें लेकर आपको भावनाओं में नहीं बहना चाहिए।

5.समझदारी नहीं 52 हफ्ते का लो स्टॉक
अगर किसी शेयर की कीमत 52 हफ्ते के लो लेवल पर पहुंच जाती है, तो गिरते हुए बाजार में कुछ निवेशक वैल्यू इन्वेस्टमेंट करने लगते हैं। वे अग्रेसिव तरीके से ऐसे शेयरों की तलाश करने लगते हैं, जिनकी कीमत 52 हफ्ते के लो पर पहुंच गई है। उन्हें लगता है कि ऐसे शेयर में पहले ही गिरावट आ चुकी है, इसलिए उनमें निवेश करने पर अच्छा रिटर्न मिल सकता है। हालांकि, इनमें से कुछ स्टॉक्स ‘वैल्यू ट्रैप’ साबित हो सकते हैं। इस बारे में ओम्नीसाइंस कैपिटल के सीईओ विकास गुप्ता ने बताया, ’52 हफ्ते का लो किसी स्टॉक को रिसर्च करने की वजह हो सकता है, लेकिन सिर्फ कीमत देखकर ऐसे शेयर में निवेश करना अच्छा नहीं होता।’

6.जारी रखें एसआईपी 
कई छोटे निवेशक बाजार में गिरावट आने पर अक्सर एसआईपी रोक देते हैं। हालांकि, सच तो यह है कि मंदी के बाजार में एसआईपी के जरिए किए गए निवेश पर अधिक रिटर्न मिलने की संभावना होती है। बाजार में करेक्शन होने पर एसआईपी की उसी रकम में आपको म्यूचुअल फंड्स की अधिक यूनिट मिलती हैं।

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