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बचत बनाम निवेश: जानिए दोनों के बीच कैसे बिठाएं सही संतुलन !!

अधिकांश लोगों का यह मानना होता है कि निवेश के बजाए बचत करना ज्यादा बेहतर विकल्प है। ऐसा इसलिए क्योंकि निवेश आमतौर पर जोखिम के अधीन होता है। सेविंग का सीधा सा मतलब होता है कि आप अपने पैसों को या तो फिक्स्ड डिपॉजिट में लगा दें या फिर सेविंग अकाउंट में उसे जमा करा दें। इन दोनों पर ही समय-समय पर ब्याज मिलता रहता है।

वहीं दूसरी ओर निवेश का मतलब होता है कि आप अपनी पूंजी को किसी एसेट्स में लगा रहे हैं, जिसे आप काफी प्रॉफिटेबल मानते हैं और जहां बेहतर रिटर्न की उम्मीद रहती है। लेकिन इसके बावजूद लोग निवेश के बजाए बचत को बेहतर मानते हैं क्योंकि ये जोखिम रहित तरीका है। लोगों को यह समझना होगा कि बचत और निवेश दोनों पूरी तरह से अलग अलग उद्देश्यों की पूर्ति के लिए होते हैं। कोई न सिर्फ अकेले बचत कर सकता है और न ही सिर्फ निवेश। इसके बजाए यह सलाह दी जाती है कि पहले कुछ बचाएं और बाकी हिस्से का फिर निवेश करें।

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अगर आपको विरासत में धन नहीं मिला हुआ है तो आप अपनी गाढ़ी कमाई का निवेश करेंगे और अगर आपको तत्काल धन की आवश्यकता है, तो आपको अपने निवेश को समय से पहले बेचना होगा। ऐसे में आप संभावित बेहतर रिटर्न को खो देंगे जो कि आपके निवेश के उद्देश्य को भी खत्म कर देगा। लेकिन अगर आप आसान रास्ता चुनें और सिर्फ अपने पैसों को बचाते रहें तो आप अपने पैसों को बढ़ाने और उस पर बेहतर रिटर्न पाने की संभावनाओं को खो देंगे।

सेविंग अकाउंट में जमा राशि पर वर्तमान में अमूमन 4 फीसद तक का सालाना ब्याज मिल जाता है। हालांकि महंगाई के लिहाज से यह काफी कम है, जो कि आपकी सेविंग को बड़ा करने में काफी वर्षों का वक्त लगा देगा। वहीं अगर आप एफडी का चुनाव करते हैं तो आप जमा पर 7 से 8 फीसद तक का ब्याज हासिल कर सकते हैं। यह भी वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करने में आपकी मदद नहीं कर सकता है, क्योंकि आपको रिटायरमेंट के लिए एक बड़े कॉर्पस की जरूरत होगी।

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जब आप बचत कर रहे हों तो आपको कुछ चीजें याद रखनी चाहिए:

आपकी बचत आपके निजी खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त होनी चाहिए। इसमें लोन का भुगतान, बीमा की लागत, यूटिलिटी बिल, खाना और कपड़ों का खर्च शामिल होता है। यानी आपकी सेविंग अगले 6 महीनों तक इन खर्चों को वहन करने लायक होनी चाहिए। ऐसा इसलिए कि अगर किसी सूरत में आप अपनी नौकरी भी खो दें तो आपको तत्काल आर्थिक समस्या न आए। यानी जब तक आप नई नौकरी ढूंढें आपका काम चलता रहे।

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ध्यान रखें कि आपकी बचत लक्ष्य के साथ होनी चाहिए। इससे आपको आइडिया लग जाएगा कि आपको कितनी बचत करनी है और कितने समय के लिए। उदाहरण के तौर पर अगर आप अपने बच्चे की पढ़ाई के लिए सेविंग कर रहे हैं तो आपको मालूम होना चाहिए कि आपको कितना पैसा बचाना है और अपने बच्चे के भविष्य को कैसे सुरक्षित रखना है।

कुल मिलाकर सार यह है कि न सिर्फ बचत और न सिर्फ निवेश आपके भावी लक्ष्यों की पूर्ति के लिए काफी है। यानी आपको निवेश और बचत के बीच उचित तालमेल बिठाना होगा।


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