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राकेश झुनझुनवाला से जानिए क्‍या है शेयर बेचने का सही समय !!

किसी शेयर से 100 फीसदी रिटर्न मिल जाने के बाद क्या उसे बेच देना चाहिए? या फिर उच्चतम स्तर छू लेने के बाद भी शेयर को बनाए रखना चाहिए? ज्यादातर निवेशकों को ये सवाल मुश्किल लग सकते हैं. पर, दिग्गज निवेशक राकेश झुनझुनवाला के लिए ये प्रश्न आसान हैं. फीफा की सालाना बैठक में शिरकत करने पहुंचे झुनझुनवाला ने इस पहेली को सुलझाने के लिए दो उदाहरण दिए. उन्होंने कहा कि तीन साल में टाइटन ने उन्हें 100 फीसदी रिटर्न दिया. लेकिन, वह इस शेयर को अब भी बनाए रखेंगे. कारण है कि इस सफलता को दोहराना आसान नहीं है.

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उन्होंने सवाल करते हुए कहा, “बड़ी तेजी के बाद अगर शेयर मुझे अगले तीन साल में अब भी 15-18 फीसदी रिटर्न दे तो मुझे उसे क्यों बेचना चाहिए?” झुनझुनवाला ने कहा कि वह अगले धमाकेदार शेयर की तलाश में टाइटन का शेयर नहीं बेचेंगे. कारण है कि इस तरह का प्रदर्शन दोहराना आसान नहीं होता है. झुनझुनवाला को ‘भारत का वॉरेन बफे’ कहा जाता है. उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है क‍ि वह किसी वैल्यूएशन तक शेयर को खरीदते ही रहते हैं. लेकिन, इसका यह मतलब भी नहीं है कि अगर उन्होंने ज्यादा वैल्यूएशन पर कोई शेयर खरीदा तो वह चपत लगने पर उसे होल्ड नहीं करेंगे.

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उन्होंने ल्यूपिन के शेयरों का उदाहरण दिया. जब झुनझुनवाला ने इसे खरीदा था तो इस शेयर का मूल्य महज 8 रुपये था. यह 2,200 रुपये तक गया. लेकिन, दोबारा 820 रुपये के स्तर पर आ गया. 

झुनझुनवाला ने कहा, ‘ल्यूपिन से मुझे इसकी अपेक्षा नहीं थी. तीन साल में यह शेयर 600 रुपये से बढ़कर 2,200 रुपये तक गया. मेरा अनुमान था कि ल्यूपिन 1,400 से 1,500 रुपये के स्तर के नीचे नहीं जाएगा. लेकिन, मैंने इसे अब भी होल्ड कर रखा है. कारण है कि मैं फार्मा इंडस्ट्री को लेकर बेहद आशावान हूं. इसमें ल्यूपिन एक अच्छी कंपनी है.’ 

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शेयरहोल्डिंग के डेटा से पता चलता है कि झुनझुनवाला ने मार्च, 2003 से अपने पोर्टफोलियो में ल्यूपिन को रखा हुआ है. झुनझुनवाला ने कहा कि महज इसलिए कि उन्होंने बहुत दौलत कमा ली है. लोग केवल उनकी सफलता की कहानी जानते हैं.

वह बोले, “मेरी गलतियों की कोई बात नहीं करता है. लोग हमें बहुत होशियार समझते हैं. हमें मालूम है कि हम कितने गधे हैं.” दिग्गज निवेशक ने कहा कि जीवन का मतलब पछताना नहीं, बल्कि गलतियों से सीखना है.

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