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RBI Monetary Policy : RBI की बैठक हुई समाप्त,किये गये यह बड़े बदलाव जिनसे मिलेगा आपको फायदा !!

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) बुधवार को RBI Monetary Policy का ऐलान किया। रेपो रेट 6.5% पर बरकरार रखी गई है। रिवर्स रेपो रेट में भी बदलाव नहीं किया गया है। यह 6.25% है। हालांकि, एसएलआर में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई है। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.5% रहने का अनुमान जताया है।

रिटेल महंगाई दर आरबीआई के लक्ष्य से कम

अक्टूबर में खुदरा (रिटेल) महंगाई दर 3.31% रही। यह पिछले 13 महीने में सबसे कम है। रिटेल महंगाई लगातार 3 महीने से आरबीआई के 4% के लक्ष्य से भी नीचे है। ऐसे में एनालिस्ट का मानना था कि आरबीआई रेपो रेट में इजाफा नहीं करेगा। ब्याज दरें तय करते वक्त आरबीआई खुदरा महंगाई दर को ध्यान में रखता है।वहीं, आरबीआई ने होम, ऑटो और पर्सनल लोन को लेकर बड़ा फैसला किया है। अब आरबीआई के ब्याज दरों पर फैसला करते ही बैंकों को भी इस पर फैसला लेना होगा। अगर आसान शब्दों में समझें तो आरबीआई की दरें घटते ही बैंक आपकी EMI घटा देंगे। यह नया नियम एक अप्रैल 2019 से लागू होगा।

पिछली बैठक में आरबीआई ने आउटलुक सख्त किया था

आरबीआई ने पिछली बैठक में रेपो रेट तो नहीं बढ़ाई लेकिन, आउटलुक न्यूट्रल से बदलकर सख्त कर दिया। यानी आगे ब्याज दर बढ़ाई जा सकती है। पिछली बैठक में आरबीआई की 6 सदस्यीय मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में सिर्फ एक मेंबर चेतन घाटे ने रेपो रेट 0.25% बढ़ाने के पक्ष में वोट किया था।

रिजर्व बैंक की बैठक के फैसलों पर इसलिए भी खास नजर है क्योंकि आरबीआई की स्वायत्तता को लेकर सरकार से उसके विवादों के बाद पहली समीक्षा बैठक है। हालांकि, 19 नवंबर को आरबीआई बोर्ड की बैठक में विवाद के कुछ मुद्दों पर सहमति बन गई थी।

लिक्विडिटी क्राइसिस दूर करने पर चर्चा

इस बैठक में एक अहम चर्चा IL&FS के लोन 91,000 करोड़ रुपए के लोन डिफॉल्ट पर भी होगी। रिजर्व बैंक इस कंपनी के ऋण ने चुकाने से पैदा हुई लिक्विडिटी की कमी को दूर करने के लिए उपाय सुझा सकती है। इस दिसंबर में मनी मार्केट डेफिसिट के 1.44 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए मुश्किल स्थिति बन सकती है।

इंफ्लेशन टार्गेट घटने की उम्मीद

उम्मीद की जा रही है कि महंगाई लक्ष्य या तो घटाया जाएगा या फिर इसे 3.9 फीसदी की दर पर ही रखा जाएगा। इसमें कोई बदलाव नहीं होगा।

RBI Monetary Policy पर एक नज़र

>> रिजर्व बैंक ने SLR में 0.25 फीसदी की कटौती की है. मौजूदा एसएलआर 19.5 फीसदी है।

कैश रिजर्व रेश्यो (CRR) में केंद्रीय बैंक ने कोई बदलाव नहीं किया है।

>> अक्टूबर में हुई पिछली समीक्षा बैठक में भी रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था. >> एमएसएफ बैंक रेट 6.75 फीसदी पर बनाए रखा है।
>> रिजर्व बैंक का कहना है कि मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ग्रोथ को सपोर्ट करने और रिटेल महंगाई दर को 4 फीसदी (+/-2%) रखने के लिए रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किय।

FY19 में 7.4% GDP ग्रोथ का अनुमान- बैंक ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.4 फीसदी रखा है।वहीं, वित्त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान 7.5 फीसदी है।

महंगाई दर का अनुमान घटाया- रिजर्व बैंक का कहना है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही (अक्टूबर-मार्च) के दौरान महंगाई का अनुमान 2.7-3.2 फीसदी रह सकती है. पहले यह अनुमान 3.9-4.5% था।

क्या होता है SLR-जिस दर पर बैंक अपना पैसा सरकार के पास रखते है, उसे एसएलआर कहते हैं।नकदी की लिक्विडिटी को नियंत्रित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।कॉमर्शियल बैंकों को रिजर्व बैंक के निर्देशानुसार एक निश्चित राशि नकदी, सोना या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त बॉन्डों में निवेश करना होता है। इस पर रिजर्व बैंक नजर रखता है, ताकि बैंकों के उधार देने पर नियंत्रण रखा जा सके।

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