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‘भारत के वॉरन बफेट’ राकेश झुनझुनवाला ने बताया, कौन हैं उनके गुरु !!

  • राकेश झुनझुनवाला को ‘भारत का वॉरेन बफेट’ भी कहा जाता है।
  • वह अपने पिता को निवेश की दुनिया का पहला गुरु मानते हैं।
  • पिता के अलावा राधाकिशन दमानी और रमेश दमानी ने भी उनको गाइड किया।
  • 1988 में झुनझुनवाला की नेट वर्थ एक करोड़ रुपये थी जो 1993 में 200 करोड़ हो गई।
  • वह अपने पोर्टफोलियो का प्रायः 5 प्रतिशत डेट में लगाते है।

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भारत में राकेश झुनझुनवाला को कौन नहीं जानता। शेयर बाजार में निवेश के लिए सभी उनकी टिप्स को सबसे ऊपर मानते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि उन्हें यह ज्ञान कहां से मिला। अब राकेश ने खुद बताया है कि असल जिंदगी में उनके गुरु कौन रहे जिनकी मदद से या जिनके साथ उन्होंने सफलता के नए आयामों को छुआ। इस लिस्ट में राकेश ने सबसे पहले अपने पिता का नाम लिया और फिर अपने कुछ दोस्तों का जिक्र किया। 

भारत के वॉरन बफेट के नाम से पहचान बना चुके राकेश झुनझुनवाला ने बताया कि वह अपने पिता को अपना पहला गुरु मानते हैं। राकेश के मुताबिक, पिता ने ही उन्हें जीवन के मूल्यों के बारे में समझाया और बताया कि बड़े फैसले लेने से पहले हिचकना नहीं चाहिए। FIFA के वार्षिक कार्यक्रम में बोलते हुए राकेश ने आगे कहा कि पिता के अलावा राधाकिशन दमानी और रमेश दमानी ने भी उनको गाइड किया। 

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कौन हैं राधाकिशन और रमेश दमानी
बता दें कि राधाकिशन खुद एक अरबपति निवेशक और बिजनसमैन हैं। डी-मार्ट नाम की रीटेल चेन भी उन्हीं की है। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर इंडेक्स के मुताबिक, वह दुनिया के 176वें सबसे अमीर शख्स हैं। 8 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ वह भारत में छठे नंबर पर हैं। 

रमेश दमानी की बात करें तो वह बीएसई के सदस्य होने के साथ-साथ एक प्रसिद्ध निवेशक भी हैं। दमानी ने 1989 में स्टॉक मार्केट में कदम रखा था, तब सेंसेक्स 800 अंक पर था और तब से अबतक 50-60 गुना बढ़ चुका है। उन्हें दलाल पथ का नवाब भी कहा जाता है। 

इन दोनों के अलावा राकेश ने कमल काबरा नाम के एक अन्य निवेशक को भी अपना उस्ताद बताया है। राकेश एक अन्य शख्स से काफी प्रभावित रहे जिनका कम आयु में ही निधन हो गया था। उनका जिक्र करते हुए राकेश बोले, ‘मेरा एक दोस्त था राजीव शाह, जो काफी कम उम्र में ही दुनिया छोड़कर चला गया। हम 5-6 लोग हमेशा बैठकर सोचते कि क्या सही रहेगा। हम लोग कामयाबी के पीछे पागल थे और कभी किसी लक्ष्य को आसान नहीं समझते थे।’ 

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अपनी कामयाबी को याद करते हुए राकेश ने कहा, ‘1988 में मेरी नेट वर्थ एक करोड़ रुपये थी जो 1993 में 200 करोड़ हो गई। इसका कतई मतलब नहीं कि इसी रफ्तार से साल 2000 में यह रकम 800 करोड़ हो गई। बल्कि, 2002 में भी मेरी संपत्ति 250 करोड़ रुपये ही रही।’ 

उन्होंने बताया कि वह अपने पोर्टफोलियो का प्रायः 5 प्रतिशत डेट इंस्ट्रूमेंट्स में लगाते हैं। उन्होंने कहा, ‘लेकिन सितंबर 2001 से सितंबर 2003 के बीच मेरे पोर्टफोलियो का 40 प्रतिशत हिस्सा डेट इंस्ट्रूमेंट्स का था।’ 

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