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यह है वो बातें जो आपको एक नयी कंपनी के शेयर खरीदते वक़्त ध्यान में रखना चाहिए !!

बड़ी-बड़ी बातों के बजाय सबसे पहले यह जानते हैं कि IPO होता क्या है? IPO यानी इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग। कोई भी कंपनी जब पहली बार पब्लिक ट्रेड वाली कंपनी बनती है, तो उसे पूंजी की ज़रूरत होती है और वह शेयर बेचती है। लोग शेयर खरीदते हैं, जिससे कंपनी को बिजनस के लिए पैसा मिलता है। इसी प्रॉसेस को IPO कहते हैं। IPO जारी करने के साथ ही कंपनी स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड हो जाती है।

अब सवाल उठता है कि कंपनिया इस प्रॉसेस में जाती क्यों हैं। अब कंपनी को बिजनस फैलाने के लिए पैसा चाहिए। अगर कंपनी बैंक से लोन लेगी, तो उसे ब्याज देना पड़ेगा, जो उसके लिए महंगा होगा। वहीं लोगों से मिले रुपए पर उसे कोई ब्याज नहीं देना होगा। जब कंपनी फायदे की दिशा में बढ़ेगी, तो उसके शेयर की कीमत बढ़ेगी। इससे कंपनी के शेयर खरीदने वालों का फायदा होगा। या तो वो शेयर बेचकर मुनाफा कमाएंगे या और शेयर खरीदेंगे।

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शेयर बाज़ार के इस खेल में IPO की कीमत एक महत्वपूर्ण फैक्टर है। अगर शेयर खरीदने वाले शख्स को बाज़ार की चालाकियां नहीं पता हैं, तो शायद उसे IPO की कीमत से ज़्यादा रुपए चुकाने पड़ जाएं। तो इस खेल में शामिल होने के लिए आपको कुछ नियम-फैक्टर तो पता होने चाहिए। हम आपको बता रहे हैं कि IPO की कीमत कैसे तय होती है।

किसी IPO की कीमत तय होने में तीन फैक्टर्स की भूमिका मुख्य है:
प्री-IPO वैल्यूएशन
अब्सल्यूट वैल्यूएशन
रिलेटिव वैल्यूएशन

वैल्यूएशन यानी किसी चीज़ की कीमत लगाना या आंकना।

#1. प्री-IPO वैल्यूएशन
किसी नई कंपनी के स्टॉक खरीदते समय आप देखें कि उस कंपनी का मैनेजमेंट सेटअप कैसा है। आपको देखना चाहिए कि उसी सेक्टर के उसी हैसियत वाली दूसरी कंपनियों के स्टॉक की क्या कीमत है। आप कंपनी के भविष्य के बारे में अनुमान लगा सकते हैं कि यह चलेगी या नहीं। मार्केट के ओवरऑल ट्रेंड के साथ-साथ आप इस पर भी गौर कर सकते हैं कि उस कंपनी के स्टॉक की मांग कितनी है।

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#2. अब्सल्यूट वैल्यूएशन
इस प्रॉसेस में आप किसी कंपनी के स्टॉक खरीदने से पहले उसे पूरी तरह ठोंक-पीटकर परख लेते हैं। इसमें आप कंपनी की हुई जानकारी के आधार पर आकलन कर सकते हैं कि कंपनी के पास पूंजी कितनी है, उसके पैसे में कितना फ्लो है और उस पर कितना कर्ज है। इस तरह से आप फैसला कर सकते हैं कि आप उस कंपनी के स्टॉक खरीदेंगे या नहीं।

#3. रिलेटिव वैल्यूएशन
इस प्रॉसेस में आप स्टॉक बेच रही कंपनी की किसी और कंपनी से तुलना करते हैं। आप देखते हैं कि उसी सेक्टर में वही सर्विस दे रही किसी और कंपनी की क्या स्थिति है। क्या दोनों कंपनियां समान गति से बढ़ रही हैं। यह आकलन तभी किया जा सकता है, जब कंपनियों में अच्छा कैशफ्लो हो। इस आधार पर आप फैसला कर सकते हैं कि आपको उस कंपनी के स्टॉक खरीदने चाहिए या नहीं।

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