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अगर आपके पास है फिजिकल शेयर तो 5 दिसंबर तक बदल ले, जाने क्यों ?

यदि आपके पास फिजिकल फॉर्म में शेयर हैं तो 5 दिसंबर तक इन्हें डीमैट फॉर्म में लाना जरूरी है। इन शेयरों की खरीद-फरोख्त जारी रखने के लिए ऐसा करना जरूरी है। इसकी मियाद खत्म होने में अब केवल एक ही हफ्ता बचा है। अब भी कर्इ निवेशकों, खासतौर से बुजुर्गों के पास काफी शेयर फिजिकल फॉर्म में हैं। अगर इन्हें डीमैट फॉर्म में नहीं लाया गया तो तकनीकी रूप से ये ‘इललिक्विड’ हो जाएंगे। दूसरे शब्दों में इनकी खरीद-फरोख्त नहीं की जा सकेगी।

बीएसर्इ की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 30 सितंबर, 2018 तक सेंसेक्स की 30 कंपनियों के कुल शेयरों में करीब 4 फीसदी शेयर अब भी फिजिकल फॉर्म में हैं। ये गिनती में 400 करोड़ से अधिक शेयर हैं ।ये नॉन-डीमैट फॉर्म या फिजिकल फॉर्म में हैं।30 शेयरों वाले सूचकांक में इस तरह की अब तक ऐसी एक भी कंपनी नहीं है जिसके सभी शेयर डीमैट फॉर्म में बदले जा चुके हैं।

क्या आप भी उन्हीं निवेशकों में हैं, जिन्होंने फिजिकल फॉर्म में शेयरों को रखा हुआ है? यहां हम बता रहे हैं कि इन शेयरों का क्या होगा और कैसे आप इन्हें डीमैट फॉर्म में ला सकते हैं।

5 दिसंबर के बाद इन शेयरों का क्या होगा?

सेबी के अनुसार, खरीदार और विक्रेता फिजिकल फॉर्म में शेयरों की खरीद-फरोख्त नहीं कर सकते हैं। इस तरह 5 दिसंबर के बाद फिजिकल फॉर्म में रखे गए शेयर ‘इललिक्विड’ हो जाएंगे. हालांकि, सेंटर फॉर इंवेस्टमेंट एजुकेशन एंड लर्निंग की चेयरपर्सन उमा शशिकांत ने हाल में ही अपने कॉलम में लिखा था कि अब भी इस तरह के शेयरों को किसी के नाम किया जा सकेगा। लेकिन, नए खरीदार को इन्हें खरीदने-बेचने के लिए डीमैट में तब्दील करना होग।

कैसे डीमैट में बदलवाएं?

यदि डीमैट खाता नहीं है तो सबसे पहले इसे खुलवाएं। यदि शेयरों को संयुक्त रूप से रखा गया है तो डीमैट खाते को सभी होल्डरों के नाम से खुलवाना होगा. डीमैट खाते में होल्डिंग का क्रम वैसा ही होना चाहिए जैसा शेयरों में है। डीमैट खाता खोलने के लिए सभी होल्डरों का केवार्इसी होगा. इसमें उनके संपर्क, पते, र्इमेल, बैंक अकाउंट का ब्योरा इत्यादि लिया जाएगा। फिर फिजिकल शेयरों के लिए डीमटीरियलाइजेशन रिक्वेस्ट फॉर्म (डीआरएफ) लेना होगा।अमूमन अलग-अलग कंपनियों के लिए अलग डीमैट फॉर्म भरने की जरूरत होती है।

डीमैट खाता कहां खुलता है?

डीमैट खाता देशभर में किसी भी डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट (डीपी) के साथ खुलवाया जा सकता है. डीपी एक फाइनेंशियल सर्विस फर्म है जिसका डिपॉजिटरी के साथ गठजोड़ होता है। डीमैट फॉर्म में लाए गए शेयर क्लाइंट के डीमैट खाते में रहते हैं।इन्हें एक खास क्लाइंट आर्इडी दी जाती है।

क्या है चार्ज?

किसी भी अन्य वित्तीय सेवा की तरह डीपी के साथ खाता खुलवाने में फीस और ट्रांजेक्शन चार्ज की खास भूमिका होती है। खाता खुलवाने की फीस के अलावा एनुअल मेनटिनेंस फीस, ट्राजेक्शन चार्ज का भी महत्व है।

डॉक्यूमेंटेशन :

खाता खुलवाने के अलावा कर्इ एप्लिकेशन फॉर्म भरने पड़ते हैं. साथ ही पवर आफ अटॉर्नी (पीओए) सहित एग्रीमेंट पेपर पर हस्ताक्षर करने होते हैं। पीओए में बैंक और डीमैट का ब्योरा होता है। इसे कर्मचारी नहीं, बल्कि ब्रोकर के नाम किया जाता है।सिक्योरिटी के ट्रांसफर के लिए इसकी जरूरत पड़ती है।

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