how to choose stock broker

Stock Broker को चुनते समय ध्यान में रखने वाली बातें, जो स्टॉक मार्केट में निवेश के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है !!

भारत मे जैसे जैसे इंटरनेट की पहुच लोगों तक बढ़ रही है वैसे वैसे ऑनलाइन बिज़नेस का क्रेज भी बढ़ता जा रहा है इन्ही ऑनलाइन व्यवसाय में से एक व्यवसाय शेयर बाज़ार भी है।

किसी भी व्यवसाय को शुरू करने से पहले उसके बारे में गहन अध्यन अवश्य कर लेना चाहिए। इसी तरह शेयर बाज़ार में भी उतरने से पहले कुछ विश्लेषण जरूर किया जाना चाहिए, शेयर बाज़ार में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु आपका ब्रोकर है जिसके माध्यम से आप शेयर की खरीद फरोख्त को अंजाम देते है।

Stock Broker को चुनने से पहले क्या करें।

एक नए निवेशक को सबसे पहले अपने निवेश के तरीकों को समझने की कोशिश करनी चाहिए।

  • क्या आप इंट्राडे ट्रेडिंग के आधार पर शेयर बाज़ार में निवेश शुरू करना चाहते है?
  • क्या आपका नज़रिया लम्बी अवधि के निवेश से है?
  • कहीं आप कमोडिटी बाज़ार में तो निवेश नही करना चाहते है?

उपरोक्त बिन्दुओ के आधार पर ही अपना ब्रोकर चुने, ताकि आप शेयर बाज़ार का सही से फायदा उठा सकें।
इंट्राडे ट्रेडिंग– यह एक दिन की ट्रेडिंग होती है जिसमे आप अपनी पोजीशन को अगले दिन के लिए नही रखते है। यदि आप इस ट्रेडिंग के उद्देश्य से बाज़ार में निवेश करना चाहते है अथवा डे ट्रेडिंग करना चाहते है। तो इसके लिए डिस्काउंट ब्रोकर को चुना जाना चाहिए। क्योंकि जब आप प्रत्येक दिन ट्रेड करते है तो ब्रोकरेज भी उतनी ही बार आपको अपने ब्रोकर को देनी पड़ती है।

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इंट्राडे ट्रेडिंग में ज्यादा ब्रोकरेज आप के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। क्योंकि एक बार इंट्राडे ट्रेड करने पर आपको ब्रोकरेज का भी आंकलन करना पड़ता है ज्यादा ब्रोकरेज होने पर, आपको अपना लक्ष्य ज्यादा दूर रखना पड़ता है ताकि मुनाफा हो सके, और अगर ब्रोकरेज बहुत कम होगी तो बहुत छोटे लक्ष्य को रखकर भी मुनाफा बनाया जा सकता है।

लम्बी अवधि के निवेश के लिए- जब आप लम्बी अवधि के लिए निवेश करते है और वर्षो तक उस निवेश को धर्य के साथ बनाये रखते है। यहां आपको एक फुल ब्रोकर को चुनना चाहिए जो सुरक्षा के साथ आप के पोर्टफोलियो को अच्छे से प्रबंधित करने की सुविधा उपलब्ध कराता हो, बेशक ब्रोकरेज ज्यादा हों सकती है लेकिन फुल ब्रोकर आपको यूनिक सेवा देते है जो लम्बी अवधि के निवेश के लिए काफी लाभदायक साबित होते है।

कमोडिटी ट्रेडिंग के लिए– यदि आप शेयर बाज़ार के साथ कमोडिटी बाजार में भी निवेश करना चाहते है तो एक ऐसा ब्रोकर चुने, जो आपको कमोडिटी ट्रेडिंग की भी सुविधा उपलब्ध कराता है।

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Stock Broker को चुनते समय कौन कौन से बिंदु महत्वपूर्ण होते है?

1. ब्रोकरेज– किसी भी ब्रोकर के लिए यह एक प्राइमरी कमाई का स्रोत है जहाँ से ब्रोकर अच्छी कमाई करते है। एकं ट्रेडर के लिए ब्रोकरेज बहुत मायने रखती है। ब्रोकर को चुनते समय ब्रोकरेज का सही से आंकलन अवश्य करे। क्योंकि आपके द्वारा बनाये गए प्रत्येक सौदे पर ब्रोकरेज का अपना महत्व होता है।

2. दूसरे चार्जस– कुछ ब्रोकर ग्राहकों को डिस्काउंट ब्रोकर के तौर पर खाता खुलवा देते है और ट्रेडिंग में लगने वाले दूसरे चार्जस पर ज्यादा कटौती करते है, जिसके बारे में एक ट्रेडर को बाद में पता चलता है। इन चार्जस में एसटीटी, डिमैट डेबिट चार्जस, स्टैम्प ड्यूटी चार्जस और भी कई अन्य चार्जस होते है। इन सभी चार्जस के बारे में सम्पूर्ण जानकारी अवश्य कर लें।

3. एडवांस आर्डर– एक ट्रेडर के लिए ब्रोकर द्वारा दी जाने वाली सुविधा काफी मायने रखती है इन्ही सुविधाओं में एडवांस आर्डर भी आते है। जे की एक ट्रेडर के लिए काफी महत्वपूर्ण होते है जिनमे कवर आर्डर, ब्रैकेट आर्डर, जीटीसी आर्डर,ऐएमओ आर्डर प्रमुख है।

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4. ट्रेडिंग टर्मिनल- एक ट्रेडर अथवा किसी निवेशक के लिए ट्रेडिंग टर्मिनल का अच्छा होना बहुत जरूरी है। इन टर्मिनल के द्वारा ही आप अपने सौदे खरीदते अथवा बेचते है। यह अवश्य चेक कर ले, कि आपका ब्रोकर आपको मोबाइल आधारित ट्रेडिंग एप्लीकेशन की सुविधा उपलब्ध करा रहा है क्योंकि मोबाइल ट्रेडिंग एप्लीकेशन की मदद से आप कही भी, किसी भी स्थान से अपने पोर्टफोलियो पर नज़र रख सकते है। सभी ट्रेडिंग टर्मिनल के प्रदर्शन का आंकलन जरूर कर लेना चाहिए। शेयर बाज़ार में एक सेकंड की भी अपनी कीमत होती है। यदि आप एक सेकंड भी चूक गए तो नुकसान उठाना पड़ सकता है। अतः ट्रेडिंग टर्मिनल का विश्लेषण बहुत मायने रखता है।

5. मार्जिन लेवेरेज– यह ट्रेडिंग का महत्वपूर्ण भाग है प्रत्येक ब्रोकर अपने ग्राहकों को अतिरिक्त मार्जिन उपलब्ध कराता है ताकि आप कम धनराशि में भी बड़ी वैल्यू के सौदे बना सकें, और ज्यादा लाभ कमा सके। कुछ ब्रोकर इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए अच्छी कैटेगरी के स्टॉक पर 15 से 25 गुना तक लेवेरेज की सुविधा देते है और डिलीवरी के सौदों पर भी 1.5 गुना से 3 गुना तक मार्जिन अपने ग्राहकों को देते है। बाज़ार में किसी विशेष स्थिति में लेवेरेज में बदलाव किया जा सकता है। यह ब्रोकर का अपना अधिकार है।

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6. Call on trade– यह सुविधा ब्रोकर अपने उन ग्राहकों को देते है जो फ़ोन कॉल के माध्यम से ट्रेड करना चाहते है और जिसकी एवज में ब्रोकर प्रत्येक कॉल पर 20 रुपए से 100 रुपए तक का शुल्क वसूलते है।

7. कस्टमर सपोर्ट – जब आप किसी ब्रोकर के पास अपना ट्रेडिंग अकाउंट खुलवाते है तो समय- समय पर आपको कुछ समस्याओ का भी सामना करना पड़ता है जिसके लिए आपको उस ब्रोकर के ग्राहक सेवा अधिकारी से बात करनी पड़ती है ताकि अप उस समस्या को सुलझा सके| लेकिन प्राय देखा गया है कुछ ब्रोकर ट्रेडिंग अकाउंट खुल जाने के बाद अपने ग्राहकों को सही से सपोर्ट नहीं करते है जिससे ग्राहकों को परेशानी होती है अत: ट्रेडिंग अकाउंट खुलवाने से पहले किसी भी वेबसाइट पर जाकर उक्त ब्रोकर की कस्टमर सपोर्ट सेवा की समीक्षा का विवरण अवश्य जाँच ले, जोकि भविष्य में आपके बहुत काम आता है| 

8. कमोडिटी ट्रेडिंग- यदि आप शेयर बाज़ार के साथ कमोडिटी ट्रेडिंग में भी कारोबार करना चाहते है तो एक ऐसे ब्रोकर का चुनाव करे जो आपको शेयर बाज़ार के साथ, कमोडिटी बाज़ार में भी सौदे बनाने की सुविधा उपलब्ध कराता हो, ताकि आप सोने और चांदी जैसी मूल्यवान धातुओं को भी ट्रेड कर सके|

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उपरोक्त सभी बिंदु शेयर बाज़ार में कार्यरत अनुभवी ट्रेडर्स के अनुभव का हिस्सा है और इस पोस्ट का मकसद उन नए ट्रेडर को एक बेहतर ब्रोकर चुनने में मदद करने से है ताकि शेयर बाज़ार में निवेश की शुरुआत करने से पहले आप एक अच्छा फैसला कर पाए|
शेयर बाज़ार से जुडी किसी अन्य जानकारी के लिए आप कमेंट सेक्शन में कमेंट करके पूछ सकते है|

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