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इस तरीके से आप अपने डीमैट अकाउंट को फ्रॉड से बचा सकते है !!

डीमैट खातों को निवेशकों के लिए कई वजहों से सुविधाजनक माना जाता है. कारण है कि इनके जरिए प्रतिभूतियों और फंड को आसानी से ट्रांसफर करने की सुविधा मिलती है. हालांकि, फ्रॉड के मामलों ने कुछ निवेशकों का अनुभव खट्टा किया है. कुछ हफ्ते पहले ही डालमिया ग्रुप कंपनी ने शिकायत दर्ज कराई. ग्रुप का कहना था कि उसकी सहायक कंपनियों के डीमैट खातों से ब्रोकर ने गैर-कानूनी तरीके से म्यूचुअल फंड यूनिटें ट्रांसफर कीं. इनका मूल्य 344 करोड़ रुपये था. इस घटना ने डीमैट खातों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए. निवेशकों के लिए क्या रास्ता है अगर डीमैट में रखे शेयर या म्यूचुअल फंड यूनिट ट्रांसफर कर दिए जाए? क्या ट्रांसफर की गई यूनिटों को ट्रेस किया जा सकता है? इस तरह के फ्रॉड से बचने के लिए क्या तरीके अपनाए जा सकते हैं?

आज पहले के मुकाबले फ्रॉड की गुंजाइश काफी कम है. सेबी ने इसके लिए काफी इंतजाम किए हैं. उसने पावर ऑफ अटॉर्नी (PoA) एग्रीमेंट की ड्राफ्टिंग के नियमों को कई मानकों पर कस दिया है. इसके तहत सेटेलमेंट के मकसद से प्रतिभूतियों और फंडों को ट्रांसफर करने के ब्रोकर के अधिकार सीमित कर दिए गए हैं. ब्रोकर बिना लिखित अनुमति के क्लाइंट के नाम से ट्रेडिंग नहीं कर सकते हैं. जेरोधा के संस्थापक नितिन कामथ कहते हैं कि सेबी के दिशानिर्देशों ने निवेशक के खाते में पड़े पैसों के दुरुपयोग की आशंका को कम किया है. उदाहरण के लिए पहले संभव था कि शेयरों की खरीद के बाद उन्हें क्लाइंट के खातों में न ट्रांसफर किया जाए. उन्हें एक पूल बनाकर जुटाया जा सकता था. इसका इस्तेमाल किसी अन्य ग्राहक की मार्जिन जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता था.

इलेक्ट्रॉनिक डीमैट सिस्टम में ऑडिट ट्रेल पीछे छोड़े बगैर खरीद-फरोख्त करना असंभव है. इस तरह अगर शेयर या यूनिटों को अवैध तरीके से ट्रांसफर कर भी दिया जाए तो भी उन्हें ट्रैक किया जा सकता है.

सिलायंस सिक्योरिटीज में ईडी व सीआईओ बी गोपकुमार कहते हैं, “फ्रॉड को रोकने के लिए काफी उपाय कर दिए गए हैं.” सैमको सिक्योरिटीज के सीईओ जिमित मोदी कहते हैं, “धोखाधड़ी के अलावा ब्रोकर के पास थर्ड पार्टी अकाउंट में प्रतिभूतियां ट्रांसफर करने का कोई विकल्प नहीं है.” डालमिया भारत मामले में ब्रोकर ने यूनिटें ट्रांसफर करने के लिए धोखे से कंपनी के अधिकृत हस्ताक्षर बनाए थे. सुरक्षा उपायों के बाद भी निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है. जालसाज ब्रोकर सिस्टम में खामी खोजते रहते हैं.

 फ्रॉड से कैसे बचें –

सुनिश्चित करें कि डिपॉजिटरी के साथ मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी अपडेट हो.

-डीमैट खाते में हर एक ट्रांजेक्शन के बाद डिपॉजिटरी की ओर से भेजे गए एसएमएस और ईमेल स्टेटमेंट चेक करें.

-हर महीने ब्रोकर की ओर से जारी किए जाने वाले होल्डिंग स्टेटमेंट को जांचें.

-ब्रोकर अगर फ्रॉड करता है तो उस स्थिति में डिपॉजिटरी को समय से शिकायत करें.

-ब्रोकिंग अकाउंट में अतिरिक्त पैसा रखने से बचें. सेविंग अकाउंट से केवल खरीद के समय ही पैसा ट्रांसफर करें.

-ऑफलाइन ट्रेड के लिए ब्रोकर के पास हस्ताक्षर की हुई डिलीवरी इंस्ट्रक्शन स्लिप न रखें. सतर्क रहने की जिम्मेदारी निवेशक की है. उसे शेयरों और म्यूचुअल फंड यूनिटों पर लगातार नजर रखनी चाहिए. -ब्रोकर और डिपॉजिटरी (CDSL या NSDL) दोनों डीमैट खाते में सभी ट्रांजेक्शन के एसएमएस अलर्ट या ईमेल भेजते हैं. हर ट्रांजेक्शन के ब्योरे को देख लेना महत्वपूर्ण है.

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